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Samay se samvad / समय से संवाद

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संपादक का नाम – डाॅ. कृष्णा जाखड़
विधा – पत्र
पृष्ठ – 96
हार्डबाउंड
प्रकाशन वर्ष – 2020
ISBN – 978-9383148394

Description

1 अगस्त 1927 को राजस्थान के छोटे-से गांव सीगड़ी (झुंझुनू) के किसान परिवार में जन्मा एक बच्चा आर्थिक अभावों से दो-दो हाथ करता हुआ अपने मित्रों, सहयोगियों और मेधा के बूते हासिल छात्रवृत्ति के बल पर पढ़ता है, आगे बढ़ता है और अमेरिका के एक विश्वविद्यालय में गणित का प्रोफेसर बनता है। यही नहीं- आगे चलकर वह अपने जैसे बच्चे-बच्चियों के संघर्ष को कभी भूलता नहीं और लौटकर अपनी मातृभूमि को सब कुछ सौंप देता है। जो कमाया, जो कमा रहा है। कभी अढ़ाई रुपये की छात्रवृत्ति पाने वाला यह शख्स अपनी तनख्वाह में से दस करोड़ से अधिक रुपये शिक्षा के क्षेत्र में सौंप चुका है। सौंपने का यह क्रम न थमा है, न थमने वाला है। आज भी अपनी सालाना कमाई का आधा- यानी लगभग 65 लाख रुपये भारत की विभिन्न संस्थाओं को प्रतिवर्ष भेज रहा है और शिक्षा की अलख जगा रहा है। विशेषकर महिला-शिक्षा क्षेत्र में। किसी व्यापार में कमाई पूंजी से नहीं- अपने कठोर परिश्रम से कमाए वेतन से। ऐसा उदार शख्स और कोई नहीं- ‘करोड़पति फकीर’ के रूप में प्रख्यात डाॅ. घासीराम वर्मा है। राज्यसभा सदस्य का आॅफर ठुकराने वाला, पद्मश्री तक के आवेदन को नकारने वाला, प्रशंसा-यश के मोह से दूर यह व्यक्ति न केवल अपने उदात्त भाव बल्कि अपने उदात्त विचारों के कारण भी जानने योग्य है। यही नहीं, स्वयं को ‘महान’ कहने के आडंबर के बीच सच क्या है और महान कैसे बना जा सकता है, यह भी जाना जा सकता है। प्रस्तुत कृति में डाॅ. घासीराम वर्मा के पत्र हैं, जो उन्होंने अपने परिचित कृष्णा जाखड़ और दुलाराम सहारण के नाम लिखे हैं। ये पत्र न केवल व्यक्तिगत संवाद करते हैं, अपितु समय से भी संवाद करते हैं। विस्तृत दृष्टि से देखें तो ये सिर्फ और सिर्फ समय से संवाद करते हैं। कृति में संग्रहित पत्र समय का आईना हैं और भविष्य का सुनहरा खाका।

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